कठे सुं ल्याऊँ पांख कठे सुं ल्याऊँ घोड़ी,
Author: Pushpanjali
चांदी की कटोरी में धुलवाई,मंडवाले दादी में मेहंदी ल्यायी
मनिहारी बनकर आयो नंद जी को लाल
हमारे दोनों रिश्तेदार।
यो तो नट गयो नंद जी को लाल गैया चराऊँ कोनी
जबसे देख्यो है थारो श्रृंगार दादी, रानीसती दादी भजन
भोत बरसां के बाद गोद हुई है आबाद
हर बार तेरे दर पे नवगीत सुनाएंगे
हनुमत धरूं में ध्यान करो कल्याण
श्याम थारी ओल्यु आवे जी
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