सांवरिया को अपना बना कर तो देखो।
जैसा भी हूं मैं सांवरे निभाना पड़ेगा
मैया म्हाने दिज्यो अमर सुहाग,ओढाऊं थाने बाला चुनरी।
जयपुर वाली चुनरी, जा पर मंडियां दादर मोर, ओढ़ में नाचूंली।
में तो नाचन सारू ऐसा पायल भूल आई।
करो भजन मत डरो किसी से, ईश्वर के घर होगा मान
क्यूँ गुमान करे काया का मन मेरे
एक दिन छोड़ कर ये जहाँ जाना है
कैसे जीतें हैं भला लोग हरी नाम बिना
किन विद झाल्यो रे बैराग,
बेरागण रानी
मेरो राधा रमण गिरधारी समाय रहयो नैनन में।
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