हाथ बढ़ाकर मांग लो भक्तों बनेंगे सारे काम जी।
मोती से जड़ा घागरा कोई लेकर आईयो रे।
अरे जेठ मास गर्मी को महीनों प्रेम प्यास लग जावे
जागो कुंवर हनुमान हम तेरे दर आए।
आई आई सांवरिया आई रे या तो हवा समय की आई रे।
श्याम पिया तुमको आना पड़ेगा।
ग्वालिड़ा तू कोनी जाने प्रीत परायी
क्या सोव सुख नींद , मुसाफिर परदेसी रे ,
क्या भरोसा ह इस जिंदगी का ,
साथ देती नही है ये किसी का।
निश्छल मन हो तो प्रभु अवश्य मिलते हैं
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