बीरो भात भरण न आयो, म्हारो राख्यो मान सवायो,
व्रत करो रे भाया एकादशी,
माँ बापा की सेवा करले, मत बण दास लुगाई को।
तेरे नाम से ही अपनी पहचान बनाऊंगा।
दो फूलन के गजरे मन आधार हमारे
धीरे-धीरे पांव घरे म्हारी बनड़ी રहोले होले पांव धरे रे म्हारी बनडी
कौन से शहर में बना लागी रे नौकरीया
म्हारी अमर सुहागण बनड़ी फेरां में बेठी
आगणिय पधारी है म्हारी बहुराणी
मैं तो बाबुल र बागां री चिड़कोली, परदेशी सुवटीया र लार,बाबुल गठ जोड़ो करयो ।
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