तुम सजती रहो हम सजाते रहे।माँ सजाने में आनंद आता है।
Author: Pushpanjali
नाम लेते ही बन जाते हैं सारे बिगड़े काम।
जरा पर्वतों से होले होले आ, मात शेरावालिये
पहले करो रे गुरु को प्रणाम, गुरु के बिना ज्ञान नहीं।
माँ शेर पे चढ़ के आई जयकारा गूँजे गली गली
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने।🌺🌺🌺
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
अमीर चले आए, ग़रीब चले आए।🌺🌺
मैया तेरे दर पे फकीर चले आए।
चलता है यहाँ चलता है,
मेरे श्याम का सिक्का चलता है।
पहन के चोला लाल, मैया जी मेरे घर आना
आज हमारे घर में,मैया जी तेरा कीर्तन है
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