लिख दो म्हारे रोम रोम में राम राम हे उमापति
Tag: शिव तांडव स्त्रोतम shiv tandav strotam
एकदीन मैया पार्वती,भोले से लगी कहने।
sawan ki katha, सावन की कथा
कैसी बारात शिव की है आई,ना ही ब्राह्मण है ना कोई नाई।
मेरे शिव भोले भंडारी, मैं आया शरण तिहारी।
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Aarti, Shiv ji, शिव जी की आरती
जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
डमरु बजाए अंग भस्मी रमाए और ध्यान लगाए किसका
भोला भंग तिहारी, नित घोटत घोटत हारी।
शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा
चली कांवडीयों की टोली, खाकर भंगिया की गोली
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