फागण आला मेला आया, दर पर रौनक भारी से।
मेरी उम्मीद से बढ़कर, कहीं हर बात से ज्यादा
कबुतर खेत मत भेले रे,
डाकिया रे म्हारो कागद लिख दे,
सुन बागा की मोरनी थारी, घणी सुरंगी चाल
तेरे होते बाबा, क्यों खुद को समझें हारा,
भक्त हनुमत बड़ा अलबेला, वो तो लंका जलाए अकेला
काजल भरीयो कुंपलो कोई पडयो पलंग रे हेत कोरो काजलियो।
मैं आज छमा छम नाचू मेरे भोले की बारात में,
पार्वती सु बोल्या शंकर ,धाम अयोध्या चालो ये
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