बृज में मचा है फाग, तु खेलन आजा नंदलाला
घनी देर से उबे मुंडे बोल तो सरी
छैल चतुर रंग रसिया रे भवरा,
पर घर प्रीत मत कीजै,
मेरा दिल अटका सांवरिये पे,
मुझको तो किसी की खबर नहीं
मौसे भाभी भाभी बोल गयो हो रसिया होली में।
सांवरिये पे दिल अटक गया कुछ होश नहीं कुछ खबर नहीं।
कान्हा आजा ब्रिज में रंग बरसे
बजा के चंग चंग उड़ा के रंग रंग, तू खाटू चल
चला दो बिहारी जी राधा नाम पिचकारी।
फागण रंगीला आया खाटू चलो,
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