सब भगता पे रंग चढ़यो फागणियो आयो रे
बीनणी रो फेर पग भारी।
रात चढ़ी रे छैलो घर कोनी आयो
अजब होली खेले हमारे भोले बाबा,
अरे तन पीटूंगी नंदलाल तू रोज उलाहने लावे से।
तेरे चरणों में रेह के करूँ सेवा,
तुम तो मेरे श्याम जन्म के कपटी।
भर देगा वह झोली पल्ले, हो जाएगी बल्ले बल्ले।
अंजन की सीटी में म्हारो मन डोले
हरी नाम की बीके मिठाई, बिक रही बिना रुपैया में, खा लेओ ब्रज की नगरिया में।
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