रात बलम मोहे सपना आया। हो रही जय जयकार
Author: Pushpanjali
अपने ही रंग में रंग डाली चुनरिया तेरी।
मैया कैसी मनोहर गलियां सजी।
फिर तेरे दरबार पे मां, सर को झुकाने आ गई
विनती हमारी है प्रभु,यह अंधकार मिटाईये
मैया तो मेरी शरद पूनम का चांद है
चलो रे भक्तों भोले की नगरी।
एक हार बना माली, शेरावाली को पहनाना है
मैया भवन में कैसे आऊं, तेरा शेर खड़ा पेहरे पे
दिन आय गए मैया भवानी, के दिन आय गए
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