यहाँ वहा मत डोल, प्राणी हरि हरि बोल,
कर हरि सुमिरन, हरि मिल जाएंगे ।।
तेरा हाथ है जो सर पर,
मुझको फिर किस बात का डर,
ये धन दौलत दुनिया की रौनक, सब कुछ यहीं रह जाएगा,
आंधा लूला करणी रा हीना, मत कर जोर जबराई,
मैं तो राम ही राम पुकारू,
श्री राम नही मोरी सुध ली नि मैं कब से राह निहारु,
ओर कहीं ना जायें, ओर कहीं ना जायें,
बृज़ रजधानी छोड़ कर, ओर कहीं ना जाये…..
राजा जी देवरो देवसी ने दीजे रे,
मेरी रंग दे चुनरिया राम रंग में,
राम रंग में सियाराम रंग में,
मेरे अंगना में आए भगवान प्रेम रंग बरस रहा,
एक दिन मैं भी खाटू आऊं,
बाबा दर्शन थारा पाऊं,
You must be logged in to post a comment.