मेरे हृदय में अलमारी जिसमे बैठे कृष्ण मुरारी,
क्या करूं ससुराल जा के दिल मेरा लगता नहीं,
थारी काय करू जी मनवार सांवरिया महारा गिरधारी,
छाया रे बसंती रंग लो फागुन, आया रे,
भोले शंकर हम भक्तों से,
करते कितना प्यार,
जय हनुमाना वीर हनुमाना,
थारी करा मैं जय जयकार,
जय सियाराम सियाराम बोल मना
क्यों फिरता डामा डोल मना ।
इन्द्र की इन्द्राणी भी चाली तो ब्रह्मा की ब्रह्माणी हो राम
कब तक बदन छुपाएगी तेरे पीछे पड़ो लांगुरिया।
हो मेरे मतना पकड़े केश छोड़ दे पड़ जांगे भारी
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