झूला तो डाल्या श्री वृन्दावन बाग में जी।
एकादशी हे भगता की प्यारी
एकादशी हे संता की प्यारी।
मुझे जमना के पार मिलना।
पार मिलना मेरी सरकार मिलना।
मैने जान दे रे रुकमण जा लेन दे रे मेरा भगत बुलावे मेने जा लेन दे।
निराला गिरिजा माँ का लाल, निराला गजानन दीन दयाल।
सत्कर्म करने को दो हाथ दी, बड़ी है कृपा मेरे प्रभुनाथ की,
सच्चा भरोसा तेरी, बिगड़ी बात बदलेगा
सभी देव देते हैं जग में पल्ला झाड़ के।
बोली रे कोयलिया जय जय अम्बे माँ ।
टोकरी हे सिर पै धर के जमना में बड़ गया वासुदेव।
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