बीरो जी घर आया है,
तावड़ा मंदो पड़ ज्या रे,
बेटी विध को तो यो ही है विधान,
थाने जाणों पड़सी सासरिये,
ठंडी ठंडी राता पिया धोली धोली चांदनी।
गणगौरयां आले मेले पहल्यां आया रहिजो जी।
म्हारा छैल भंवर चितचोर, मारे मनडे रा मोर
कर सोलह सिंगार नैना तीखो कजरो घाल,
एजी गवांग बिचाले पीपली कलालन हिंडो घाल्यो सा
नंद के लाला ने मारी नैन कटारी।
सोने री चिड़कली रे प्यारो मारो देशड़लो।
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