नीले घोड़े रा असवार करा थारी मनवार बाबा महारे घर आओ जी,
राधिका प्रेम भक्ति रस आली।
चली जा रही है यह जीवन की रेल
मंदिर में सोए हनुमान जी कोई जाके जगा दो,
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
मेरा बाबा बड़ा ग्रेट
आज रो दिवस सखी जाऊं बलिहारा,
नीले नीले घोड़े पर सांवरा आता है
कर्मों का लिखा कहीं जाता नहीं। राम तेरी नगरी में घाटा नहीं
बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी।
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