सिंग सजा दिया, मेह बरसा दिया, रण में भेज दी ज्वाला
सतगुरु पुरा म्हाने मिल्या है सुमरतां,
लाडकड़ी लाडेसर म्हारी,
जीण बाईसा,
बिन धोयाँ दुख ना मिटै रै, बीरा मेरा तिरणा किस बिध होय॥
गोरजा यो वर कुंन ढूंढयो।
साधो भाई देखो ना नज़र पसार,
या काया तन में रेल चलें,
आधी रात सिखर तैं ढलगी हुया पहर का तड़का।
मात भवानी ज्ञान बताइए सबसे पहले मनाऊं में।
मनड़ा रे जे तू बालाजी ने ध्याय सी,
गिरजा के नंदन थाने पहले मनावा
You must be logged in to post a comment.