अपनी शरण लगाना।करके कोई बहाना,
चांदीवाला घूगरा घड़ा दे मारा बालाजी,
ऐसी है न्यारी खाटू नगरी,
प्यारी सी सूरत, नैन नशीले, चितवन मन को भाए,
समय तू धीरे धीरे चल,
कब आयेंगे मेरे घर श्याम।
महे भी खाटू जासयां जी मेहर कर श्याम धनी।
धीरे-धीरे चलो भोले घुंघरू ना बाजे।
है स्वर्ग सी खाटू नगरी तारणहारा है श्याम।
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
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