मनमोहन तुझे रिझाऊं,तेरे नित नए लाड़ लड़ाऊं
जय गणेश जय गणेश नाम तुम्हारा
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,आओ जी गजानन आओ।
मंदिर के आसपास खेले गजानन,हमसे ना बोले।
अब क्या होगा गणपत जी बीच बुढ़ापे में,
हो सांझ या सबेरा तूं बोल राधे राधे।
खाटू वाले श्याम कस के पकड़ियो,मेरा हाथ।
कोई बाजे रे बाजे लिलन रा घमकोड़,छम छम बाजे घुघरा।
कान्हा जी तुम ऐसी बंसी बजाना
धोली धोली रे ध्वजा फरूखे रे,धोरा धरती माय
You must be logged in to post a comment.