Koi shyam sundar se kah do ye Jake,
वो तो हो रही लाल गुलाल मइयां हो रही लाल गुलाल,
अखियां हो रही लाल गुलाल,श्याम मेरे घर कब आओगे
सुन दर्जी सियो दे चोखा कुर्ता,में जाऊं उड़ता उड़ता, ओ फागुन के मेले में।
इसकी मोर छड़ी के आगे सब संकट मिट जाएगा।
थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।
काहे मुझे चिढ़ाए राधे बोले काला री। काला काला रंग भी मेरा बड़ा निराला री।
सपना में दिखयो जी, दीखयो जी म्हारो श्याम धणी।
रंग लगाना है आज तुम्हें रंग लगाना है।
सुन राधिका दुलारी में, हूँ द्वार का भिखारी,
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