तर्ज, कठे सु आई सूट
मोहन मुरली वाला रे सांवरिया बंसी वाला।थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।
मिन्दरों में ढूंढ आई,पुजारी ने पूछ आई। कुन तीरे ओले छिपग्यों रे,मोहन मुरली वालो।
मोहन मुरली वाला रे सांवरिया बंसी वाला।थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।
बागों में ढूंढ आई,माली ने पूछ आई। फुलां रे लेरे ओले छिपग्यों रे,मोहन मुरली वालो।
मोहन मुरली वाला रे सांवरिया बंसी वाला।थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।
रसोया में ढूंढ आई, नायण ने पूछ आई।जांगलेरे ओले छिपग्यों रे,मोहन मुरली वालो।
मोहन मुरली वाला रे सांवरिया बंसी वाला।थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।
कुंवा पर ढूंढ आई,पनिहारन पूछ आई। घड़ले रे ओले छिपग्यों रे,मोहन मुरली वालो।
मोहन मुरली वाला रे सांवरिया बंसी वाला।थाने भोत घणा दिन ढूंढियों रे म्हारा मोहन मुरली वालो।