अरे जेठ मास गर्मी को महीनों प्रेम प्यास लग जावे
Category: विविध भजन
आई आई सांवरिया आई रे या तो हवा समय की आई रे।
क्या सोव सुख नींद , मुसाफिर परदेसी रे ,
क्या भरोसा ह इस जिंदगी का ,
साथ देती नही है ये किसी का।
कई खेल्या कई खेल सी ,
आवेंगे कभी क्या श्याम सखी,
मन जाने कैसा होता है।
आते नहीं दुख के दिन हैं,
पापा हैं तो मुमकिन है,
चाली म्हारी सूरता ये गगन मंडल में ,
रात दिवस ला के माहि रे,
चाल सखी सत्संग में चाला सत्संग म सतगुरु आसी
काया रंग चुनड़ी ऐ ,
थारो राम मिलन कैसे होय,,
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