मेरा छोड़ दे दुपट्टा नंदलाला,सबेरे दही लेकर आऊंगी।
Author: Pushpanjali
रूठ गया है, रूठ गया है।रूठ गया है,आज देखो कन्हैया मेरा।
में हूं शरण में तेरी संसार के रचैया
कब से धरा सिसकती कान्हा,तुझे रही है पुकार।
गोविंद चले आओ,गोपाल चले आओ
हो गई दुनिया में बदनाम,कन्हैया तेरे पीछे
वृंदावन में हुकुम चले,बरसाने वाली का
जब कभी तुमको आवाज दूं में,सांवरे तुमको आना पड़ेगा।
उंगली पकड़कर ले आया मुझे,खाटू नगरी घुमाया मुझे।
काली कमली वाला मेरा यार है
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