गजानन की निकली सवारी,संग भक्तों की भीड़ है भारी।
Author: Pushpanjali
गौरा तेरे लाला का, ऊंचे पर्वत पे डेरा है
झूले गणपति विघ्न हरी,झुलावे माता पार्वती,
नरसी जी री डीकरी नानी बाई नाम
अयि गिरीनंदिनी नंदितमेदिनी विश्व विनोदिनी नंदीनुते
हैं सच्चा दरबार पवन के लाला का
मेरा जी करता है दौड़ के सालासर आ जाऊं।
मोटे पेट वाले गिरजा लाल,गजानन तेरी जय होवे।
काले से लाल बनाय गई रे,गोरी बरसाने वाली।
हमें तो जो भी दिया,श्याम बाबा ने दिया
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