किसको पता है कब यह हंसा, तन पिंजरे को छोड़े
Author: Pushpanjali
कृष्ण नाम अति मीठा है,कोई गा के देख ले।
तूं करले भजन जवानी में,मत करना वेट बुढ़ापे का।
होले होले बंसी बजाय मेरा मोहन, गोपियां ठुमकती आई रे,राधा रानी भी आई।
मां गौरा के लल्ला गणेश जी,कभी अंगना हमारे भी आओ।
नदिया किनारे बगिया हो, उसमें मां का मंदिर।
जिमो जीमो जी थे बंशी वाला श्याम,जिमावे थारा सेवकिया।
हो गए भव से पार,लेकर नाम तेरा
ना पुष्पों के हार, ना सोने के दरबार,ना चांदी के सिंगार
बंशी वाले रे मुरलीवाले रे तेरी राधा तुझे पुकार रही
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