ए जी सिया जैसी सुंदर नारी रमैया संग बन का गई।
थारा रंग महल में अजब शहर में
आजा रे हंसा भाई,
हार गया मैं इस दुनिया से, अब तो बाबा गले लगा ले,
सासरीये मै न जाऊ मेरी माँ मेरो मन लाग्यो राम के भजन में।
रामदेवजी रो ब्याव मंड्यो
रूणीचे
गुरु को ना पहचान सका तो, जग जाना तो जाना क्या,
संतो रे मुख पर बरसे नूर, राज मोरी सईयाँ ए
ऊँचो भवानी थांरो देवरो ए माता चामुण्डा
चामड़ा पूतळी, रामैयो रट ले
सुरता ने ले नी जगाय, पिंजर पड़ जासी
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