म्हारो हिरो सूनो राम बिना म्हने,चैन नहीं आवे रे
सजन म्हारा घर आवो मेहमान
पाँच तत्त्व और तीन गुणां से, रचियो मन्दिरियो
जोगीड़े ने जादू कीनो रे, म्हारो तन मन बांधे लीनो रे ॥
खेले आंगन में गोपाल और बैठी यशोदा माता।
हो गई मैं तेरी दीवानी शंकर जी। चरणों का दास बना लो शंकर जी ।
गौरा फेरे पढ़े भोले बाबा के साथ
जय जय श्री राधा रमण, जय जय नवल किशोर
कहाँ जा छुपे हो,
प्यारे कन्हैया,
यहाँ लाज मेरी,
लूटी जा रही ह।
खोल दे दरवजा श्याम तन्नै मिलन नै आयी
You must be logged in to post a comment.