फुलड़ा बरसे रे सांवरिया म्हारो खेले होली,
खेलो खेलो मारा नंद जी का लाल आयो फागणियो।
बाड़ तळे कर बाहि रे तम्बाकू
होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने में आइए।
बरसाने आए बनवारी होली खेले राधा प्यारी।
फागण का महीना बाबा आऊं तेरे द्वार
देवरियो म्हारो रीझ रयो पर नारियां
मोहे ऐसा रंग लगादे रे के ब्रज में मैं खो जाऊं
राधा बोली ओ मेरे कन्हैया होली खेलो न बंसी बजैया ।।
राधा करना ना तू कमाल रंग तो लगाने दे।
You must be logged in to post a comment.