मांथ में मेमंद ल्याव गणगौर, रखड़ी उपर दादर मोर।
अतो गेरा गेरा बिरमां दास जी रा छावा बालम रसिया गेरो जी फूल गुलाब रो।
आज हम श्रीजी को झूला झूलएंगे।
तेरी गलियों का हूँ आशिक़,
तू एक नगीना है।
जपो श्याम नाम मेरे भाई , बड़ा ही सुखदाई, लगे हैं बड़ा प्यारा है
मेरे मन में पारसनाथ तेरे मन में पारसनाथ
तुझे हाथों से सजाऊं बड़े चाव से।
मारी चंद्र गौरजा भलाई नादान गरजा
आठ कपट री इंडूणी म्हारी गवरल गई रे तलाब
ऊँचा धोरा ए म्हारा हरीया जंवारा
You must be logged in to post a comment.