भवानी कर दो बेड़ा पार।
बोल पड़ी मंदिर की देवी क्यों मंदिर में आया रे।
भवानी तेरा नाम बड़ा अनमोल।
छुप जाई रे चंदा बादल में। पिया की नजर मेरे काजल में।
उधो गए द्वारका धाम बिरज मोहे उड़ उड़ खावे रे।
शेरावाली के रूप अनेक जगत को प्यारी लगे,
ब्रह्मदास जीरा इशरदास जी, ये गरबना किजो जी।
उभी म्हार गवरजा छांजइयां री छांवा
महादेव जी आया लेववां जी।
म्हार रे इशर दास और कानी राम दोनू सारीसा।
चांद चढ्यो गिगनार, किरतयां ढल रही जी ढल रही है
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