मन की बजी मुरलिया रे, भज लो कृष्ण कन्हैया
सारे बृज विच मचण बधाइयाँ, की हरी जी प्रकट भये,
धोरा वाली धरती नखत बना,
काली नागिन डोले रे,
हिन्दो घलई दूँ सत्संग बाग में,
ओ गुरूजी,
तुलसी जी की गुरु लुगाई जी शीतल भयो शरीर
बहती हैं अखियों से धार,
आ जाओ सांवरे,
सांवरिया की बंशी गुजरिया ले गई रे।
तर्ज आसरो बालाजी म्हाने थारो। आसरो माताजी म्हाने थारो,थे कष्ट निवारो,के आवो म्हारे आंगने पधारो,थारी मै करा हां जय जयकार,थारी मै करा मनवार।। ऊंचो थारो सजीयो दरबार,ऊंचो थारो सजीयो दरबार,थारी महिमा रो मै पायो कोनी पार,माताजी थारी महिमा रो पायो कोनी पार,थाने जो मनावे करो थे बेडा पार,थाने जो मनावे करो बेडा पार,आसरो माताजी म्हने […]
हे हरा रुख कटवाईयो ना।पैर गऊ के लाइयो ना
भूल गई मेरी सुरता भूल गई।
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