मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे, वो तो भाजो चलो आवे रोतो वंशी वट पे
ठुमक ठुमक चले अइयो रे मेरे छोटे गजानन,
लोगो के सहारे बड़े होंगे,मेरा तो सहारा श्याम तू है
सांवरिया लो संभाल कही न खो जाऊ
मानो तो मैं कृष्ण कन्हैया, ना मानो तो बस एक ग्वाला
सुबह सुबह जब मेरी आंखे खुलती है, आँखों के सामने बस आरती घुमती है,
दिल मेरा ले गया सांवरिया,
ओढ़ के काली कमलिया।
ज्यूँ-ज्यूँ कार्तिक बीत्यो जावै,
त्यूं-त्यूं फागण नीडै आवै,
प्यारी लागे ओ सांवरिया,
थाकि मुकट मणि।।
हमें तो लूट लिया लाल चुनरी वाली ने।
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