उड़ के गगन गए बाला, सूर्य को मुख में डाला
लगा है मेला ये श्याम बाबा का,
आँख फड़ूखे, बोले कागलियो,
म्हारो हर्षे छे हिवड़ो आज,
साँवरियो आवेलो,
चाँद भी फीको पड़ गयो रे,
सांवरियो जादू कर गयो रे,
केसा सजा दरबार है खाटू वाले का इंतज़ार है,
श्याम सलोने का प्यारा श्रृंगार है,
कितना सुन्दर सांवलिया सरकार है ।
राणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
हम तो आये शरण में तुम्हारी
लाज हाथो में तेरे हमारी
जो कोई लाभ लियो सत्संग को,
वाने खबर पढ़ी है,
ओ सांवरे सारे सहारे छूटे जाये रूठ जाये लोग हमसे क्या हुआ,
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