म्हारी बहु ये महलांस उतरी, बहु कर सोलह सिनगार, आज म्हारी अमली फल लीजो।
Author: Pushpanjali
आम्मू जी पाक्या नीम्बू वो फल लाग्या
चलो खेलेंगे होली वृन्दावन में।
चाल सखी सत्संगत करिए, बिरथा जनम गंवावत है
अपने तो श्याम जी अपने तो श्याम जी।
श्याम अपने चरणों में दे दे नौकरी।।
सुन जा म्हारा मोट्ट्यार, पाच्छे मुड़कर देख गोरडी कर राख्यों सिंगार
सिया निकली अवधवा की और होलिया खेले राम लला
रंग डारी मैं कनुआ कारे ने रंग डारी
खाटू नगरी में उड़ रहा रंग आई होली आई रे
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