मोरिया आछो बोल्यो रे ढलती रात में
नैणा रा लोभी कीकर आऊंसा
भाईजी गया बिजनोर, म्हार पगा में पड़ गई मोचर
आज रो मर्द यारो जोरु रो गुलाम है।
छुप गये सारे नजारे ओय क्या बात हो गई। मैंने मैया सजाई सारी रात हो गई
ममतामई ओ मैया, हमको भी अब बुलाओ
मुझे भरोसा तेरा श्याम,
तेरी जय हो शेरावाली मैया जी तेरी, जय हो शेरावाली।
तुम कर सोलह सिंगार, मैया जी मेरे घर आना।
जयपुर की लगी है बजरिया, चुनरी ले लो मैया।
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