किस्मत के लिखने वाले ने क्या, क्या लिख दिया मेरे नसीबों में
जय जय काली माँ खप्परवाली,
तेरी अँखियाँ लाल लाल हैं
आओ गोविन्द प्यारा आओ जी, मैं पकडू ला चरखी थे तो पतंग उड़ाओ जी,
,पक्षी छोड़ ताल उड़ गया पता नही जाने कीत बढ़ गया
मैंने बैठ गवाई संक्रांति मनोहर हरे हरे मनोहर सुन सजनी।
सदगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग हवा विच उड़ती जावांगी
आज दूल्हा बने हैं भोलेनाथ जोड़ी का जबाव नही।
मै रम गया तेरी काशी में,
गणपति गौरी लाला देखो चली सरोवर ओर
मेरे मन की फसी पतंग किशोरी तेरे महलन में
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