कलयुग के कथा कीर्तन में कोई राम कहे कोई श्याम कहे
प्यारो लगे मोहे कन्हिया दाऊ जी को भईया,
ओ जी थाणे राणे जी समझाय, मीरा थारे काई लागे रे गोपाल,
झांझर कीन्हे छुपाई आज मेरे मोहन दी,
गुरु मारा पारस पवन सु ही झिणा
कौन दिशा में मेरो बैठो रे साँवरियो,
हम बिक गए खाटू के बाजार में
सुन ले कन्हैया अर्जी हमारी,
तारो ना तारो ये मर्जी तुम्हारी
ये तो अधमन की खरीदार,
हमारी राधा रानी,
है धन्य तेरी माया जग में,
ओ दुनिया के रखवाले,
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