याद श्याम की आई, फिर से चली पुरवाई, छाया रे बसंती रंग लो फागुन, आया रे
तुम सुनो श्री भगवान लगाकर ध्यान भूल मत जाना, सत्संग में जल्दी आना।
जबसे बाबा थारी सेवा को काम मिल गयो।
सुन ले बाबा लखदातारी, मेरी काट दे लाचारी
उस वक्त मुझे बाबा, तूने ही संभाला था
भोले बाबा तेरे दरबार में जो आते है,
झोलियां भरते है खाली नहीं वो जाते है,
प्यालों राम रस को। एक बार सत्संग में आजा, पड़ जाए चसको।
जुड़े में संमधि लटक गयो रे।
बाबा तेरी फुल कृपा है,
सांवरे देख मेरी हालत,
तुझे भी रोना आएगा
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