जरा सर को झुकाओ वासुदेव जी तेरी टोकरी में त्रलोकी नाथ है,
हो के बुझेगा मन की बाबा, मेरा रूस गया भगवान,
गोकुल में आए त्रिपुरारी, बने हैं भोला सुंदर नारी।
दरबार में खाटू वाले के,
दुःख दर्द मिटाए जाते है,
इस काया का भेद, गुरु बिन कोई नहीं पाया है।
हमारे घर में भी रोटी तेरे खाटू से आती है,
मेरे घर आये बाबा श्याम,
दिल तेरा दिवाना हो गया,
झूम झूम कर नाचो भक्तों, श्याम जन्मदिन आ गया
मेरा लाख टके का झुनझुना खाटू ते लाई मोल
घटा चढी घनघोर हो मोहन तेरी पंतग मेरी डोर।
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