दोनों हाथ लुटाए बाबा लखदातारी रे,
काम कोई भी कर नहीं पाया, घूम लिया संसार में,
जादू मेरे श्याम जी का सर चढ़कर बोले
कभी माखन चुरा लिया,
कभी पर्वत उठा लिया,
मंडफिया के राजा, कभी किरपा नजरिया, दुखिया पर डालना रे,
एक दुखिया तुझे पुकारे, कब आओगे बालाजी प्यारे,
मुझको अपनी शरण लगा लो हे वृषभान किशोरी
खाटू से आया मेरा श्याम जय जय कार करो
जय गौरी नंदन, हाथ जोड़ हम, वंदन कर करते है।
एक दिन खाली करनी पड़सी रे, काया कोटडी भाड़ा की ।
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