बम भोले बम भोले
कैलाश का वासी बम भोले
मोरे उज्जैन के महाकाल,
म्हारे शीश पे लगा दो, थारी मोर छड़ी,
नैन तेरे है कजरारे और घुंगराले बाल
रुद्र काली भद्र काली जय कपाली रुद्र काली।
कर्म धर्म री सड़क बनाय ल्यो, सूरत नुरत रा चीला रे
शंकर से कह दो कर ले श्रंगार, गौरा पहनायेंगी फूलों के हार
नैना लागे जब मोहन से, नैना को कुछ रास ना आए
मैं हूं बालम पढ़ी-लिखी तेरे घर को स्वर्ग बना दूंगी
जो होगा सो होगा हो जाने दीजिए
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