देखो होली की आई है बहार फागुन महीने में।
तेरे डमरू की धुन सुनके, मैं काशी नगरी आई हूँ
गुरु वकील बण आवे, लख चौरासी का कागज फाड़े, मुकदमो जितावे ।।
साया बनकर हर पल मेरे साथ चलता है
बन गई बन गई आज गौरा दुल्हन, आज मेरे जमीं पर नहीं हैं कदम।
ओ मोरछड़ी वाले, कब तक तेरी राह तकूँ
गौरा बैठी दुल्हन बनके आज मेरे भोले आएंगे
मुझको ना रोको कोई,बाबा श्याम ने बुलाया है।
काज सुधारे भोले भक्तन के,
भोले रखवाले,
सत् की सीडी संग संग चढना रस्ते में भीड़ नहीं से।।
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