गोपाल सूना सूना तुम बिन ये
ब्रज है सारा।
पूछ रहे भोलेनाथ गौरा रानी क्या लोगी,
हम है मछली,तू है पानी,दाता तेरी भक्ति देदे ।
भोला नंदी पे बैठ के आया रे करे
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
आओ रे भक्तों निहारे झांकी बाबा श्याम की।
अर्धनारी रूप धरता अर्धनारी रूप धर्ता अर्धनारी रूप धरता।
फागन रंग रंगीला मेला आया रे।
म्हारो सेठ बडो अलबेलो।
बाबा हारे का सहारा खाटू नरेश हमारा
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