श्याम जी चोखी है गुलाल थारी नगरी की सांवरा चौखी है
होली हमारी लठमार रसिया,
दुनिया में चलती देखी हैं,
मैंने दो सरकार हैं,
रोती हुई आंखों को मेरे श्याम हंसाते हैं
पतझड़ में ही फूल खिले तो बहारा ने कून पूछेगो।
म्हारो पियो बसे है परदेश,लिख रही कागदियो।
भीगी जाए यह खाटू नगरिया, ओ श्याम सांवरिया, कि द्वारे तेरे रंग बरसे।
तू आजा नीले पर चढ़कर मेरे सर पर घुमा दे मोर छड़ी।
फागण आयो रे श्याम बुलायो रे।
आयो फागण मचेगी बड़ी धूम खाटू में बाबा श्याम जी तेरे।
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