था पर दारमदार, गाड़डली हाँको जी थे हांको।
होली खेले तेरे सागे सांवरिया सरकार।
कुरजां ऐ म्हारा भंवर मिलादयो ऐ
जब तुलसी वृंदावन आए, राम ना कोई गाए,
भर पिचकारी मारी है फाग मचायो श्याम।
मोहे गैया बना दे रे श्याम तेरे गोकुल की।
आ गया खाटू वाला,
वो आ गया खाटू वाला,
आज बृज में होली रे रसिया।
धीरे-धीरे मार श्याम पिचकारी
पिचकारी कान्हा पिचकारी
झीनी झीनी उड़े रे गुलाल होली खेले संवारियो।
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