मैं तो पानीडा ने गई मेरे श्याम मरद चाले अड़ अड़ के
ओ भाभी मेरी ,हंस-हंसकर तूं बोल,देवर तेरे आडो आसी रे
आजा रे बटेऊ खड़ी नीम के तले।
दरबार तेरा सांवरिया मेरो जी ललचावे से।
महीनो फागण को सांवरिया थारी ओलु आवे रे। महीनो फागण को।
हनुमत ने खेली ऐसी होली हनुमत ने।
फूल चढ़ाऊं मैं भोले पर फूल नहीं मेरा दिल है।
अरे मैं वृंदावन को जाऊं मेरे श्याम खेल रहे होली
होलियां में रंग उड़े उड़े उड़े रे गुलाल,
पाये लागु कर जोरी श्याम मौसे खेलो ना होली।
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