ऐ छोरिया जावो म्हारा राज बनसा ने घर लावोसा।
मैं तो बिना टिकट के जाती संग म्हारो बालमो होतो रे।
खेलन गया था हे कन्हैया मेरा खेलन गया था हे।
आओ जी आओ म्हारे हिवड़े रा पांवणा
आया फागण मेला सुहाना, कि जग हुआ श्याम धनी का दीवाना
रंगों की महकी खुशबू फागन का महीना आ गया
शीश का दानी बैठ गया है आज खजाना खोल के।
गीगा घड़ी एक सोजा रे,
अब की भाभी बस तुमसे यह कहना है
उड़तो रंग गुलाल रसिया होरी में
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