बाजी रे बाजी रे बाजी मधुर मुरलिया, मनमोहन की बाजी ।
होली रंग बिरंगी आई लिन्हीं मौसम ने अंगड़ाई
सुपनो बैरी जुलम कर्यों।
पिलो सांगानेर से मंगा दो रसिया।
ओ भवर सा पानी भर्ती के लडगो टांटियो,
दिल गई जाटनी हार, खाटू के सांवरिया।
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कागलिया गेरो गेरो बोलेकागलिया, गेरो गेरो बोले नी रे – २ म्हारो परवानो बातलियो परदेस परदेसिड़ा ओलु थारी आवेनी रे कागलिया बाग़ तो लगा दियो रे – २ म्हारा बागां में घुमणियो परदेस परदेसिड़ा ओलु थारी आवेनी रे कागलिया, हौद तो बनाय लिया रे म्हारा होदां में नहावणीयो परदेस परदेसिड़ा ओलु थारी आवेनी रे कागलिया, […]
थारो इसो सुहानो रूप है भावज मेरी।।
झलक पहले जैसी दिखानी पड़ेगी,
ऊँचो घाल्यो पालणो,यो जल जमना रे तीर
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