सांझ होने को आई,धोबनिया रोटी नाय लाई।
मैया कह रही सवेरे सवेरे, देखो हम को जगाया करो ना
म्हारी पांचों ही बहुआ राजी, म्हारी सूरत राम से लागी।
पलके ही पलके बिछाऐंगे, जिस दिन ईशर गवरजा घर पे आएंगे
नाचण दे, नाचण दे, नाचण दे, सारी सखियाँ न नाचण दे,
पातलिया इशरजी, गलीयां मं आव गौरां झूमती ।
रिद्धि सिद्धि गौरी नंदन का, अगर मैं सेवक होता।
बाज रही जी बाज रही, सोन्या घर थाली बाज रही
सुणो लाडलड़ री दादी, पतासा देदेना।
थार पोता की सुन के मै आई, दादीजी म्हान देवो बधाई
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