राजा चलती जवान मेरी रुकती नहीं
राणा जी तेरी एक न मानूंगी, रोज सत्संग में जाऊंगी।
होज्या होशियार गुरांजी के शरणै, दिल साबत फिर डरना क्या ॥
हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी।
तेरी लटा मेरे मन भाई,
ओ भोले भंडारी,
राम जैसा नगीना नहीं, सारे जग की बजरिया में,
कबसे खड़ा है दास तुम्हारा,
चौखट पे सरकार,
सत में मिले सत्संग में मिले कीर्तन में मिले भगवान,
बंसी वाले तेरा शुक्रिया
तूने जीवन में सब कुछ दिया
बनी पूछे बाबा से ए बाबा, मैं किस विध मिलने जाऊं रंगीला आया है बागों में
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