चाच पॉख बीन काया देखी
हँस नजर कोनी आयो ले सादो भाई।
चादर झीणी राम झीणी,
समय समय की बात ह्
घट राखो अटल सुरती ने, दरसन कर निज भगवान का
कळप मत काछब कुड़ी ए
रमय्ये री बाता रूडी ए
बोली एक अमौल ह ज कोई जानें बोल
गौरी के सुवन सुजान प्रथम थारो यस गांवा जी
गुरां जी से ज्ञान लियो,
जद हुई म्हाने जान।।
गोरा शिव को नाच नचावत है
नाचत नाच नचावत है ।
तेरे हाथ की हम कठपुतली,
है कुछ भी नहीं औकात,
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